Skip to main content

डॉ बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर

 वंदनीय डॉ. आंबेडकर की पवित्र स्मृति देशभक्त महान राष्ट्रीय नेता एवंभारतरत्न डा० बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर जी की 129 वीं जयंती पर ह्रार्दिक शुभकामनाएं । अभिवादन करना मैं अपना स्वभाविक कर्तव्य समझता हूं। उन्होंने स्वर्ण समाज की ‘छुओ मत’ प्रवृत्ति से निर्मित रूढ़ियों पर कठोर प्रहार किए और समाज की पुनर्रचना करने का आह्वान किया। कष्ट तथा अपमानित जीवन बिताने वाले समाज के बहुत महत्वपूर्ण वर्ग के लिए डॉ. आंबेडकर ने सम्मान का जीवन जीना संभव बनाया। उनके इस कार्य के द्वारा राष्ट्र पर जो महान उपकार किया गया उसका ऋण उतारना संभव नहीं है।’  कदम-कदम पर उनके विचारों का अनुसरण करने की आवश्यकता है. उनका जीवन प्रेरणा देने वाला है. उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रासंगिक बातों का विचार न कर दीर्घकालिक विचार करते हैं, ऐसे ही व्यक्ति महामानव कहलाते हैं. बाबा साहेब ने समाज में अधिकारों के लिये तो संघर्ष किया, लेकिन वर्ग संघर्ष को बढ़ावा नहीं दिया.  उनके लिये राष्ट्रहित सर्वोपरि रहा. समाज से विद्रोह नहीं किया तथा अनुयायियों को सही दिशा दिखाई, यह उनके जीवन की विशेषता रही. उन्होंने समता, स्वातंत्र व बंधुत्व पूर्ण समाज के निर्माण के लिये प्रयास किया. देशभक्त महान राष्ट्रीय नेता एवंभारतरत्न डा० बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर जी की 129 वीं जयंती पर ह्रार्दिक शुभकामनाएं ।


Comments

Popular posts from this blog

भोजन की बर्बादी

भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश के लिए यह पाठ पढ़ना जरूरी है, क्योंकि एक तरफ विवाह-शादियों, पर्व-त्योहारों एवं पारिवारिक आयोजनों में भोजन की बर्बादी बढ़ती जा रही है, तो दूसरी ओर भूखे लोगों द्वारा भोजन की लूटपाट देखने को मिल रही है। भोजन की लूटपाट जहां मानवीय त्रासदी है, वहीं भोजन की बर्बादी संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। एक तरफ करोड़ों लोग दाने-दाने को मोहताज हैं, कुपोषण के शिकार हैं, वहीं रोज लाखों टन भोजन की बर्बादी एक विडंबना है। एक आदर्श समाज रचना की प्रथम आवश्यकता है कि अमीरी-गरीबी के बीच का फासला खत्म हो। शादियों, उत्सवों या त्योहारों में होने वाली भोजन की बर्बादी से हम सब वाकिफ हैं। इन अवसरों पर ढेर सारा खाना कचरे में चला जाता है। होटलों में भी हम देखते हैं कि काफी मात्रा में भोजन जूठन के रूप में छोड़ा जाता है। 1-1 शादी में 300-300 आइटम परोसे जाते हैं, खाने वाले व्यक्ति के पेट की एक सीमा होती है, लेकिन हर तरह के नए-नए पकवान एवं व्यंजन चख लेने की चाह में खाने की बर्बादी ही देखने को मिलती है। इस भोजन की बर्बादी के लिए न केवल सरकार बल्कि सामाजिक संगठन भी चिंतित हैं। भारतीय संस...

भारत में अभिव्यक्ति की आजादी

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार असंतोष की अभिव्यक्ति की भी अनुमति देता है  परंतु सफ़ल लोकतन्त्र एवं राजनीतिक स्वतन्त्रता के लिए नैसर्गिक अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का होना आवश्यक है। जिस समाज में स्वतन्त्रतापूर्वक विचारों की अभिव्यक्ति न हो सके, उस समाज पर अनैतिकता का शासन हो जाता है ।वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के आधार पर एक समाज स्वतन्त्र रूप से विकसित हों  सकता है । भारत के वर्तमान परिदृश्य में स्वाभाविक रूप से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता परिलक्षित होती है । देश के सर्वाधिक बौद्धिक परिवेश वाले जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय  ( जेएनयू ) में देश के टुकड़े करने और भारत की बर्बादी तक जंग जारी रखने के नारों को बुलंद करने वालों पर संविधान के दायरे में की गयी कार्यवाही को यदि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला माना जाता है तो इस प्रकार के प्रतिबन्ध राष्ट्र की अस्मिता और अखंडता के लिए अपरिहार्य है । सामाजिक नियन्त्रण के अभाव में अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता जानलेवा बीमारी के अतिरिक्त और कुछ नहीं । सामाजिक नियन्त्रण के तत्वों में नैतिक मूल्य, धर्म, साहित्य, शिक्षा, क़ानून और लोक...

कभी कभी अलविदा का अर्थ रुक जाना होता हैं

वो जब तुमसे कहे कि आज के बाद बात नहीं करूंगा  तुम फिऱ भी बात न करना , वो जब कहे कि आज के बाद वो तुमसे नहीं मिलेगा तो तुम हंसी में उड़ा देना , पर जब वो आख़िरी बार तुम्हारे लौट आने का इंत...