राजनीतिक लोकतंत्र तब तक स्थाई नही बन सकता जब तक कि उसके मूल्य में सामाजिक लोकतंत्र नही हो | सामाजिक लोकतंत्र का क्या अर्थ है ? इसका अर्थ है वह जीवन शेली जो स्वाधीनता समानता तथा भाईचारा को मान्यता देती हो स्वाधीनता सामनता तथा भाईचारे को एक अलग त्रयी के रूप नही देखा जाना चाहिए ,ये तीनो मिलकर एक एसी रचना करते है की इन तीनो में से किसी एक को भी लग कर दिया जाये तो लोकतंत्र के मूल्य ही समाप्त हो जायेगे ,और मूल्य ही समाप्त होते ही उसका व्यापक उद्देश संकुचित हो जायेगा ,
स्वाधीनता को सामनता से नही अलग किया जा सकता उसी प्रकार स्वधीनता और समानता को बन्धुत्व से भी अलग नही किया जा सकता है , समानता के अभाव में स्वाधीनता से कुछ का आधिपत्य अनेक पर स्थापित होने की स्थिति बनेगी स्वाधीनता बिना समनाता के वैयक्तिक फल अथवा उद्यम को समाप्त कर देगी |
स्वाधीनता को सामनता से नही अलग किया जा सकता उसी प्रकार स्वधीनता और समानता को बन्धुत्व से भी अलग नही किया जा सकता है , समानता के अभाव में स्वाधीनता से कुछ का आधिपत्य अनेक पर स्थापित होने की स्थिति बनेगी स्वाधीनता बिना समनाता के वैयक्तिक फल अथवा उद्यम को समाप्त कर देगी |
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